सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निगम पाषर्द लोक सेवक की श्रेणी में आते हैं और भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत उन पर मुकदमा चलाया जा सकता है.
शीर्ष अदलात ने कहा कि भ्रष्टाचार निवारण कानून, 1988 ने लोक सेवक की परिभाषा का दायरा बढ़ाने पर गौर किया और इसे लोक प्रशासन में शुद्धता लाने के लिये ही लागू किया गया है.